➤ अदाणी एग्री फ्रेश ने 31 अगस्त से हिमाचल में सेब खरीद के नए रेट लागू किए
➤ 80-100 फीसदी रंग वाले एलएमएस सेब का भाव 85 से बढ़कर 108 रुपये किलो, 23 रुपये की बढ़ोतरी
➤ बागवानों ने एमआईएस का लंबित भुगतान जल्द जारी करने और योजना के लिए 1500 करोड़ रुपये के प्रावधान की मांग की
शिमला। हिमाचल प्रदेश के सेब उत्पादकों के लिए खरीद सीजन के बीच राहत की खबर सामने आई है। अदाणी एग्री फ्रेश ने प्रदेश में सेब खरीद के लिए नई दरें जारी कर दी हैं। कंपनी की ओर से घोषित ये रेट 31 अगस्त 2026 से लागू हो गए हैं। नई दरों में कई प्रमुख श्रेणियों के सेब के दाम पिछले वर्ष की तुलना में बढ़ाए गए हैं।
सबसे बड़ी बढ़ोतरी 80 से 100 फीसदी रंग वाले एलएमएस श्रेणी के सेब के भाव में हुई है। इस ग्रेड का खरीद मूल्य पिछले साल के 85 रुपये प्रति किलो से बढ़ाकर इस बार 108 रुपये प्रति किलो कर दिया गया है। यानी बागवानों को इसी श्रेणी में पिछले साल की तुलना में 23 रुपये प्रति किलो अधिक मिलेंगे। सेब खरीद के रेट बढ़ने से उत्पादन लागत और मौसम की चुनौतियों के बीच बागवानों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।
नए रेट में किस ग्रेड के सेब का कितना दाम
अदाणी एग्री फ्रेश की ओर से जारी नई दर सूची के अनुसार 80 से 100 फीसदी रंग वाले सेबों में एलएमएस ग्रेड का रेट 108 रुपये प्रति किलो तय किया गया है।
इसी रंग श्रेणी में अन्य ग्रेड के लिए भी अलग-अलग दरें निर्धारित की गई हैं।
| सेब की श्रेणी | नया खरीद रेट |
|---|---|
| 80-100% रंग वाला LMS | ₹108 प्रति किलो |
| 80-100% रंग वाला ES | ₹89 प्रति किलो |
| 80-100% रंग वाला EES | ₹73 प्रति किलो |
| 80-100% रंग वाला EL | ₹60 प्रति किलो |
| 60-80% रंग वाला LMS | ₹80 प्रति किलो |
| 60-80% रंग वाला ES | ₹67 प्रति किलो |
| 60-80% रंग वाला EES | ₹54 प्रति किलो |
| पित्तू और EL ग्रेड | ₹43 प्रति किलो |
नई रेट सूची रामपुर, रोहड़ू, सैंज, जड़ोल टिक्कर और टुटूपानी स्थित अदाणी एग्री फ्रेश के खरीद केंद्रों पर लागू होगी। इससे इन क्षेत्रों के बागवानों को अपनी फसल की ग्रेडिंग और गुणवत्ता के आधार पर भुगतान मिलने की उम्मीद है।
पिछले साल के मुकाबले कितना बढ़ा भाव
वर्ष 2025 में कंपनी की ओर से 80 से 100 फीसदी रंग वाले प्रीमियम रॉयल सेब के लिए 85 रुपये प्रति किलो का रेट तय किया गया था। वहीं 60 से 80 फीसदी रंग वाले एलएमएस सेब का भाव 65 रुपये और 60 फीसदी से कम रंग वाले सेब का रेट 24 रुपये प्रति किलो निर्धारित किया गया था।
इस साल कंपनी ने प्रमुख श्रेणियों में खरीद दरों में बढ़ोतरी की है। खास तौर पर 80 से 100 फीसदी रंग वाले एलएमएस सेब के रेट में 23 रुपये प्रति किलो की वृद्धि को बागवानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बागवानों के सामने अभी भी एमआईएस भुगतान की चुनौती
सेब के खरीद रेट बढ़ने के साथ ही बागवानों की एक बड़ी मांग मंडी मध्यस्थता योजना (एमआईएस) के लंबित भुगतान को लेकर भी बनी हुई है। सेब उत्पादक संघ ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि जिन बागवानों के भुगतान दस्तावेज पूरे हैं, उन्हें उनकी लंबित राशि जल्द जारी की जाए।
संघ के नेता संजय चौहान के अनुसार, कई बागवान आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बावजूद भुगतान का इंतजार कर रहे हैं। संघ का कहना है कि सरकार ने मार्च में भुगतान प्रक्रिया शुरू की थी। पहले 30 बोरी और बाद में 100 बोरी तक सेब देने वाले किसानों के भुगतान का निर्णय लिया गया था, लेकिन कई मामलों में एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी भुगतान नहीं हुआ है।
बोरी से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच से भुगतान में देरी
भुगतान में देरी को लेकर अधिकारियों की ओर से पिछले साल बोरियों से संबंधित कथित अनियमितताओं की जांच का हवाला दिया जा रहा है। बागवान संगठन का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी होनी चाहिए, लेकिन इसका खामियाजा उन किसानों को नहीं भुगतना चाहिए जिनका किसी अनियमितता से कोई संबंध नहीं है।
संघ ने सरकार से मांग की है कि ऐसे किसानों के मामलों को अलग करके उनके भुगतान की प्रक्रिया जल्द पूरी की जाए।
एमआईएस के लिए 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग
सेब उत्पादक संघ ने केंद्र सरकार से एमआईएस को जारी रखने और इसके लिए कम से कम 1500 करोड़ रुपये का प्रावधान करने की मांग की है। संघ का कहना है कि एमआईएस का उद्देश्य बाजार में फलों की कीमतों में गिरावट आने की स्थिति में किसानों और बागवानों को सहारा देना है।
संघ के अनुसार, वर्ष 2023 के केंद्रीय बजट में योजना के लिए राज्यों को मिलने वाले हिस्से में कटौती के बाद व्यवस्था पर असर पड़ा है। ऐसे में बागवानों को बाजार की अनिश्चितता से बचाने के लिए योजना को पर्याप्त आर्थिक समर्थन दिया जाना जरूरी है।
रेट बढ़े, लेकिन लागत और मौसम की चुनौती बरकरार
हिमाचल में सेब उत्पादन किसानों और बागवानों की आय का एक प्रमुख आधार है। ऐसे में खरीद रेट में बढ़ोतरी निश्चित रूप से राहत देती है, लेकिन बागवानों की मुश्किलें केवल बिक्री मूल्य तक सीमित नहीं हैं। उत्पादन लागत, पैकिंग, मजदूरी, परिवहन, मौसम और बाजार की अनिश्चितता का सीधा असर उनकी कमाई पर पड़ता है।
ऐसे में अदाणी एग्री फ्रेश की नई दरों से जहां कुछ श्रेणियों के बागवानों को बेहतर भुगतान की उम्मीद जगी है, वहीं एमआईएस के लंबित भुगतान का मुद्दा अभी भी महत्वपूर्ण बना हुआ है।
संघ ने चेतावनी दी है कि यदि प्रदेश सरकार ने लंबित भुगतान जल्द जारी नहीं किया तो आने वाले दिनों में आंदोलन किया जा सकता है। ऐसे में अब बागवानों की नजर एक ओर निजी कंपनियों की खरीद दरों पर और दूसरी ओर सरकार की ओर से एमआईएस भुगतान को लेकर होने वाली अगली कार्रवाई पर रहेगी।



